क्रिकेट की 7 शुरुआती भूलें
क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझना कठिन नहीं है, यदि खेल को पिच, ओवर, रन और विकेट के क्रम में देखा जाए। क्रिकेट में दो टीमें खेलती हैं और प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं; अंतरराष्ट्रीय प्...
क्रिकेट की 7 शुरुआती भूलें
क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझना कठिन नहीं है, यदि खेल को पिच, ओवर, रन और विकेट के क्रम में देखा जाए। क्रिकेट में दो टीमें खेलती हैं और प्रत्येक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं; अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में टेस्ट मैच अधिकतम 5 दिन, एकदिवसीय मैच 50 ओवर और टी20 मैच 20 ओवर का होता है। बल्लेबाज रन बनाता है, गेंदबाज उसे रोकने की कोशिश करता है और क्षेत्ररक्षण टीम कैच, रन-आउट, बोल्ड या एलबीडब्ल्यू से विकेट लेती है। क्रिकेट की आधिकारिक भाषा और नियमों का प्रमुख आधार मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियम हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में आईसीसी की शर्तें लागू होती हैं। शुरुआत में पहले पिच के 22 गज, फिर 6 गेंदों का ओवर और अंत में स्कोरकार्ड पढ़ना सीखें; यही सबसे तेज और भरोसेमंद रास्ता है।

क्रिकेट चर्चा पर मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े, आईपीएल कवरेज तथा बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति इसी बुनियादी ढांचे से समझाई जाती है। हाल के वर्षों में टी20 क्रिकेट, घरेलू लीग और डिजिटल स्कोरकार्ड ने दर्शकों की संख्या बढ़ाई है, लेकिन स्क्रीन पर चमकते रन-रेट को देखकर नियम भूल जाना अभी भी आम बीमारी है—मानो 8.50 रन प्रति ओवर देखकर कोई खुद को चयनकर्ता समझ बैठे। क्रिकेट चर्चा का उपयोगी तरीका यह है कि हर घटना को तीन सवालों से जांचें: गेंद वैध थी या नहीं, बल्लेबाज ने कितने रन पूरे किए, और विकेट किस नियम से गिरा। शुरुआती क्रिकेट शब्दावली पढ़ने पर बाउंड्री, स्ट्राइक, नॉन-स्ट्राइकर और पावरप्ले जैसे शब्द भी जल्दी स्पष्ट हो जाते हैं।
जानकारी को क्रमबद्ध तरीके से देखने के लिए आगे बढ़ें।
मिथक 1: हर मैच में 50 ओवर होते हैं — क्या यह सच है?
नहीं, हर क्रिकेट मैच 50 ओवर का नहीं होता। टी20 मैच में प्रत्येक पारी को अधिकतम 20 ओवर, एकदिवसीय मैच में 50 ओवर और टेस्ट मैच में सामान्यतः 5 दिनों के भीतर चार पारियों तक खेलने का अवसर मिलता है। प्रारूप बदलते ही समय, रणनीति, क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध और लक्ष्य का अर्थ भी बदल जाता है।
सबसे पहली आम भूल प्रारूप पहचानने में होती है। टी20 में 20 ओवर और 120 वैध गेंदें एक पारी की सैद्धांतिक सीमा बनाती हैं; एकदिवसीय क्रिकेट में 50 ओवर और 300 वैध गेंदें होती हैं। हालांकि ऑल आउट होने पर पारी पहले समाप्त हो सकती है, और बारिश, खराब रोशनी या धीमे ओवर-रेट के कारण उपलब्ध ओवर घट सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट में ओवरों की संख्या पहले से 20 या 50 पर तय नहीं होती; एक दिन में 90 निर्धारित ओवर का लक्ष्य रखा जा सकता है, लेकिन मौसम और अन्य रुकावटें इसे बदलती हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की प्रतियोगिता शर्तें यह भी तय कर सकती हैं कि बारिश के बाद लक्ष्य कैसे बदलेगा। इसलिए स्कोरकार्ड पढ़ते समय पहले प्रारूप, फिर पारी, फिर बचे हुए ओवर देखें; सीधे रन देखकर निष्कर्ष निकालना वही गलती है जो आधे शीर्षक पढ़कर पूरी खबर समझ लेने में होती है।
मैच की पहचान के लिए यह छोटा क्रम याद रखें:
- टी20: 20 ओवर, तेज रन, सीमित क्षेत्ररक्षण चरण।
- एकदिवसीय: 50 ओवर, पारी बनाने और अंतिम ओवरों में तेजी का संतुलन।
- टेस्ट: अधिकतम 5 दिन, दो पारियां प्रति टीम, और पारी घोषित करने की संभावना।
- स्थानीय मैच: आयोजक 6, 8, 10 या 20 ओवर की अलग शर्तें रख सकते हैं।
टी20 में पावरप्ले के दौरान क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध सामान्यतः पहले 6 ओवरों से जुड़ा होता है, लेकिन प्रतियोगिता की आधिकारिक शर्तें अंतिम मानी जाती हैं। यही छोटा विवरण शुरुआती दर्शक अक्सर छोड़ देते हैं।
मिथक 2: चौका हमेशा 4 रन और छक्का हमेशा 6 रन होता है — क्या यह पूरी सच्चाई है?
बल्ले से सीमा पार करने पर सामान्यतः चौके के 4 और छक्के के 6 रन मिलते हैं, लेकिन कुल टीम स्कोर अलग हो सकता है। यदि गेंद नो-बॉल या वाइड हो, तो अतिरिक्त रन जुड़ सकता है; इसलिए सीमा और अतिरिक्त का नियम अलग-अलग पढ़ना जरूरी है।
यहां नियम का थोड़ा कड़ा, लेकिन उपयोगी किनारा आता है। यदि बल्लेबाज गेंद को छुए बिना गेंद सीमा पार कर जाए, तो वह वाइड सीमा हो सकती है और टीम को कम से कम 5 रन मिलते हैं: 1 वाइड तथा सीमा के 4 रन। यदि गेंद नो-बॉल हो और बल्लेबाज उसे छक्का मार दे, तो कुल 7 रन हो सकते हैं: 1 नो-बॉल और 6 बल्लेबाजी रन। बल्ले से लगने वाली गेंद पर 4 रन सामान्यतः बल्लेबाज के खाते में जाते हैं, जबकि बाई और लेग-बाई बल्लेबाज के निजी स्कोर में नहीं जुड़ते। 2017 के संशोधित नियमों के बाद गेंद के सीमा तक पहुंचने से पहले बल्लेबाजों के पारंपरिक क्रॉस करने का प्रभाव भी बदला; अब सीमा के समय उनकी स्थिति महत्वपूर्ण होती है। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियमों का सार यही है: “रन का श्रेय घटना के प्रकार के अनुसार तय होता है।” तो हां, 4 और 6 याद रखें, मगर स्कोरकार्ड की अतिरिक्त पंक्ति भी पढ़ें।

क्रिकेट चर्चा के स्कोरकार्ड में सामान्यतः अतिरिक्त रन अलग दिखाई देते हैं। इन्हें इस तरह पढ़ें:
- वाइड: गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बाहर और वैध गेंद नहीं।
- नो-बॉल: गेंदबाज की अवैध डिलीवरी; सीमित ओवरों में अगली गेंद अक्सर फ्री हिट होती है।
- बाई: गेंद बल्ले से नहीं लगी, फिर भी बल्लेबाज दौड़कर रन बनाते हैं।
- लेग-बाई: गेंद शरीर से लगी, लेकिन बल्लेबाज ने शॉट खेलने का वास्तविक प्रयास किया।
- ओवरथ्रो: क्षेत्ररक्षक के थ्रो के बाद दौड़ या सीमा से मिलने वाले अतिरिक्त रन।
एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक बिंदु यह है कि नो-बॉल का 1 रन टीम खाते में जाता है, पर वह वैध गेंद नहीं गिनी जाती। इसलिए छह गेंदों का ओवर सात या उससे अधिक डिलीवरी में पूरा हो सकता है। वाइड भी वैध गेंद नहीं होती। स्कोरबोर्ड पर “0.5 ओवर” का अर्थ 5 वैध गेंद है, 5 कुल फेंकी गई गेंद नहीं—यह छोटा दशमलव नए दर्शकों को लगातार परेशान करता है।
विस्तृत उदाहरण और शब्दावली के लिए यह संदर्भ उपयोगी रहेगा।
मिथक 3: विकेट गिरते ही बल्लेबाज हमेशा आउट होता है — यह बिल्कुल गलत है
विकेट टूटना अपने आप में आउट होने का प्रमाण नहीं है। आउट का निर्णय किसी विशेष नियम, गेंद की वैधता, अपील और अंपायर के निर्णय पर निर्भर करता है; नो-बॉल पर सामान्यतः बोल्ड, कैच या एलबीडब्ल्यू से आउट नहीं दिया जाता, हालांकि रन-आउट जैसे कुछ तरीके लागू रह सकते हैं।
क्रिकेट में बल्लेबाज को आउट करने के कई तरीके हैं: बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू, रन-आउट, स्टंपिंग, हिट विकेट, टाइम्ड आउट और ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड। इनमें कैच के लिए गेंद का बल्ले या बल्ला पकड़े हाथ से लगना और जमीन को छूने से पहले साफ पकड़ा जाना आवश्यक है। एलबीडब्ल्यू में गेंद का पिच होना, विकेट की दिशा, बल्लेबाज का शरीर और शॉट खेलने का प्रयास जैसे तथ्य देखे जाते हैं; हर पैर पर लगी गेंद एलबीडब्ल्यू नहीं होती। रन-आउट में क्रीज के बाहर मौजूद बल्लेबाज का विकेट टूटना निर्णायक हो सकता है, पर गेंद नो-बॉल है या नहीं, यह पहले जांचना पड़ता है। आईसीसी के खेल नियम और प्रतियोगिता दस्तावेज निर्णय प्रक्रिया को प्रारूप के अनुसार स्पष्ट करते हैं। इसलिए अंपायर की उंगली से पहले “आउट” चिल्लाना भावनात्मक रूप से संतोषजनक हो सकता है, नियम की दृष्टि से नहीं।
अपील भी नियम का हिस्सा है, सजावटी शोर नहीं। गेंदबाज या क्षेत्ररक्षक अपील कर सकते हैं; अंपायर निर्णय देता है, और कुछ प्रतियोगिताओं में डीआरएस के जरिए समीक्षा मांगी जा सकती है। डीआरएस का उपयोग असीमित नहीं होता: टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 प्रतियोगिताओं में उपलब्ध समीक्षा की संख्या तथा असफल समीक्षा बची रहती है या नहीं, यह प्रतियोगिता नियम तय करते हैं। “अंपायर कॉल” की स्थिति में मैदान का मूल निर्णय बरकरार रह सकता है, भले ही तकनीकी जांच में गेंद का कुछ हिस्सा स्टंप से टकराने की संभावना दिखे। 2023 में लागू कई अंतरराष्ट्रीय नियम-व्याख्याओं ने तीसरे अंपायर की भूमिका और स्पष्ट की, लेकिन वीडियो होना निर्णय की गारंटी नहीं है। डीआरएस और अंपायर कॉल की पूरी व्याख्या देखते समय गेंद की ऊंचाई, पिचिंग और इम्पैक्ट तीन अलग चरणों में जांचें।
इन 6 आउट होने के तरीकों को पहले याद करें:
- बोल्ड: गेंद स्टंप पर लगकर बेल गिराती है।
- कैच: बल्ले से लगी गेंद जमीन छूने से पहले पकड़ी जाती है।
- एलबीडब्ल्यू: वैधानिक शर्तों के भीतर शरीर से रोकी गई गेंद विकेट को लगती।
- रन-आउट: क्रीज से बाहर बल्लेबाज का विकेट गेंद के साथ तोड़ा जाता है।
- स्टंपिंग: विकेटकीपर गेंदबाज की गेंद पर क्रीज से बाहर बल्लेबाज का विकेट तोड़ता है।
- हिट विकेट: शॉट या तैयारी में बल्लेबाज स्वयं विकेट गिरा देता है।
असल में क्या काम करता है? शुरुआती दर्शक खेल कैसे पढ़ें?
क्रिकेट समझने का सबसे प्रभावी तरीका पहले गेंद की वैधता, फिर बल्लेबाज का परिणाम और अंत में विकेट की स्थिति दर्ज करना है। छह वैध गेंदों को एक ओवर मानें, अतिरिक्त रन अलग लिखें और लक्ष्य को शेष ओवरों से जोड़ें। इस क्रम से स्कोरकार्ड की मुख्य भाषा समझी जा सकती है।
पहले टॉस, पिच और प्रारूप देखें; फिर बल्लेबाजी कर रही टीम के रन, विकेट और ओवर लिखें। स्कोरकार्ड में 167/3 का अर्थ 167 रन और 3 विकेट होता है, न कि 167 गेंद या 3 ओवर। यदि स्कोर 167/3 22 ओवर में है, तो रन-रेट 7.59 के आसपास होगी; गणना 167 को 22 से विभाजित करके होती है। लक्ष्य का पीछा करते समय आवश्यक रन को बचे हुए ओवरों से विभाजित करें, लेकिन विकेटों की संख्या भी साथ रखें, क्योंकि 60 रन और 8 विकेट की स्थिति 60 रन और 2 विकेट से रणनीतिक रूप से बिल्कुल अलग है। नेट रन रेट टूर्नामेंट तालिका में अलग गणना है और केवल एक मैच के रन-रेट से तय नहीं होती। विजडन क्रिकेटर्स अल्मनैक जैसे विश्वसनीय क्रिकेट स्रोतों पर स्कोरकार्ड देखते समय “एक्स्ट्रा”, “फॉल ऑफ विकेट” और “बॉल-बाय-बॉल” तीनों भागों को मिलाकर पढ़ें।
दूसरे चरण में गेंदबाजी का अर्थ पकड़ें। तेज गेंदबाज की गति, स्विंग और सीम; स्पिनर का टर्न, उड़ान और कोण—ये केवल प्रसारण की चमकदार बातें नहीं, बल्लेबाज के शॉट चयन को प्रभावित करने वाले तथ्य हैं। पावरप्ले में कम क्षेत्ररक्षक बाहर होने के कारण अंदर के घेरे के ऊपर शॉट आकर्षक दिखता है, मगर हवा में खेला गया हर शॉट रन नहीं देता। तीसरे चरण में खिलाड़ी आंकड़ों को संदर्भ से पढ़ें: 40 रन 25 गेंदों पर और 40 रन 55 गेंदों पर समान संख्या हैं, समान प्रभाव नहीं। स्ट्राइक रेट, औसत, डॉट-बॉल प्रतिशत और साझेदारी का आकार साथ देखकर ही प्रदर्शन का निष्पक्ष अर्थ निकलता है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति में यह तुलना और साफ होती है।
व्यवहारिक सीख के लिए यह क्रम अपनाएं:
- मैच प्रारूप और निर्धारित ओवर पहचानें।
- हर ओवर के बाद रन, विकेट और आवश्यक रन-रेट लिखें।
- वाइड, नो-बॉल और बाई को बल्लेबाज के निजी स्कोर से अलग रखें।
- विकेट गिरने पर आउट होने का तरीका देखें।
- डीआरएस या बारिश के बाद बदली शर्तों को आधिकारिक प्रसारण से मिलाएं।
- अंत में परिणाम, लक्ष्य और शेष गेंदों को एक साथ पढ़ें।
क्रिकेट चर्चा में मैच समीक्षा पढ़ते समय यही तरीका भावनात्मक शोर से आंकड़े अलग करता है।

क्या अनदेखा करना चाहिए? क्रिकेट नियमों की कौन-सी आधी-अधूरी बातें भ्रम फैलाती हैं?
शुरुआती दर्शक को सोशल मीडिया के छोटे वीडियो, अधूरी कमेंट्री और पुराने नियमों को अंतिम सत्य नहीं मानना चाहिए। नियमों का सही अर्थ प्रतियोगिता की शर्तों, अंपायर के निर्णय और गेंद की वैधता से निकलता है; केवल भीड़ की प्रतिक्रिया या खिलाड़ी का विरोध प्रमाण नहीं है।
सबसे पहले “हर टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी करती है” जैसी धारणा छोड़ें। कप्तान पिच, मौसम, ओस और लक्ष्य-निर्धारण के आधार पर निर्णय लेता है। दूसरा, “फ्री हिट पर बल्लेबाज आउट नहीं हो सकता” भी अधूरा कथन है; फ्री हिट पर बोल्ड, कैच या एलबीडब्ल्यू नहीं दिया जाता, लेकिन रन-आउट, स्टंपिंग की कुछ स्थितियां, हिट विकेट या क्षेत्र में बाधा जैसे नियम अलग तरह से लागू हो सकते हैं। तीसरा, “बल्लेबाज क्रीज में था” कह देना पर्याप्त नहीं; बल्ले या शरीर का कोई हिस्सा जमीन से जुड़े क्रीज क्षेत्र में होना चाहिए, और विकेट टूटने के क्षण का वीडियो निर्णायक हो सकता है। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब की नियम-पुस्तिका स्पष्ट करती है: “अंपायर का निर्णय खेल की औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है।” इसका मतलब अंपायर अचूक हैं ऐसा नहीं, बल्कि अपील, समीक्षा और प्रतियोगिता-विशिष्ट प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
इन बातों को अनदेखा करना सुरक्षित है:
- पुराने वीडियो में दिखने वाली सीमा-रेखा की व्याख्या।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के नियमों को एक जैसा मानना।
- डीआरएस को हर मैच में उपलब्ध समझना।
- रन-रेट और नेट रन-रेट को समान मानना।
- बल्लेबाज के रन और टीम के कुल रन को मिलाना।
- अंपायर कॉल को तकनीकी जांच का पूर्ण खंडन समझना।
शुरुआती दर्शक के लिए सबसे उपयोगी आदत आधिकारिक स्रोत देखना है। प्रतियोगिता की खेल शर्तें ओवर, समीक्षा, बारिश से प्रभावित लक्ष्य, सुपर ओवर और धीमे ओवर-रेट की सजा बदल सकती हैं। उदाहरण के लिए टी20 लीग में सुपर ओवर की प्रक्रिया और लगातार टाई होने पर अगला चरण अलग हो सकता है; इसलिए 2026 की किसी प्रतियोगिता का नियम 2024 की दूसरी प्रतियोगिता से स्वतः समान नहीं माना जाना चाहिए। क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ने की मार्गदर्शिका में लक्ष्य, डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति और अतिरिक्त रन को अलग-अलग समझें। नियमों को याद करने से अधिक जरूरी है सही प्रश्न पूछना: गेंद वैध थी, निर्णय किस आधार पर हुआ और लागू शर्त कौन-सी थी?
अब मुख्य बातों को संक्षेप में बांधें।
शुरुआती लोगों के लिए क्रिकेट नियमों का त्वरित सार
क्रिकेट समझने के लिए 11 खिलाड़ी, 22 गज की पिच, 6 वैध गेंदों का ओवर और प्रारूप के अनुसार 20, 50 या अधिक ओवर याद रखें। रन बल्लेबाज और अतिरिक्त में विभाजित होते हैं; विकेट किसी खास आउट होने के तरीके से गिरता है। नो-बॉल और वाइड वैध गेंद नहीं गिने जाते, जबकि डीआरएस, पावरप्ले, बारिश और सुपर ओवर की शर्तें प्रतियोगिता के दस्तावेज से तय होती हैं।
पहले नियम का ढांचा सीखें, फिर अपवाद पढ़ें। यही क्रम आपको चौके की चमक से लेकर 167/3 जैसे स्कोरकार्ड तक सब समझने देगा। क्रिकेट चर्चा की मैच समीक्षा, आईपीएल कवरेज और खिलाड़ी आंकड़े पढ़ते समय रन-रेट, स्ट्राइक रेट, विकेट और अतिरिक्त को अलग-अलग देखें। क्रिकेट कठिन इसलिए नहीं लगता कि नियम असंभव हैं; वह इसलिए उलझाता है क्योंकि दर्शक एक ही समय में पांच शब्दों को एक अर्थ दे देता है। इस आदत को छोड़ें, और खेल काफी साफ दिखने लगेगा।
आगे की नियमित क्रिकेट जानकारी के लिए यह अंतिम कदम उठाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट में ओवर क्या होता है?
उत्तर: ओवर छह वैध गेंदों का समूह होता है, जो सामान्यतः एक गेंदबाज फेंकता है। नो-बॉल और वाइड वैध गेंद नहीं माने जाते, इसलिए छह वैध गेंद पूरी करने के लिए गेंदबाज को 7 या उससे अधिक गेंदें फेंकनी पड़ सकती हैं। एक गेंदबाज लगातार दो ओवर नहीं फेंक सकता; ओवर समाप्त होने के बाद दूसरा गेंदबाज गेंदबाजी करता है। स्कोरकार्ड में 3.4 ओवर का अर्थ 3 पूरे ओवर और चौथी वैध गेंद है, 3.4 दशमलव ओवर नहीं।
प्रश्न: क्रिकेट मैच में कितने खिलाड़ी होते हैं?
उत्तर: एक टीम में मैदान पर 11 खिलाड़ी होते हैं, इसलिए दो टीमों के सक्रिय खिलाड़ी कुल 22 होते हैं। इनमें बल्लेबाज, गेंदबाज, विकेटकीपर और क्षेत्ररक्षक शामिल होते हैं, जबकि स्थानापन्न खिलाड़ी सामान्यतः बल्लेबाजी और गेंदबाजी की पूरी भूमिका नहीं ले सकते। टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 में यह मूल संख्या समान रहती है। स्थानीय क्रिकेट में आयोजक अतिरिक्त नियम रख सकते हैं, इसलिए टीम सूची और प्रतियोगिता दस्तावेज देखना जरूरी है।
प्रश्न: टी20 और एकदिवसीय क्रिकेट में क्या अंतर है?
उत्तर: टी20 में प्रत्येक टीम अधिकतम 20 ओवर खेलती है, जबकि एकदिवसीय क्रिकेट में अधिकतम 50 ओवर होते हैं। टी20 में 120 वैध गेंदों की सैद्धांतिक सीमा के कारण शुरुआती आक्रमण और जोखिम अधिक दिखता है; एकदिवसीय मैच में पारी बनाने के लिए 300 वैध गेंदों तक समय मिल सकता है। दोनों प्रारूपों में बारिश, ऑल आउट और प्रतियोगिता नियम उपलब्ध ओवर घटा सकते हैं। पावरप्ले और समीक्षा की शर्तें भी लीग या आईसीसी प्रतियोगिता के अनुसार बदल सकती हैं।
प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज की अवैध डिलीवरी है, जबकि वाइड ऐसी गेंद है जो बल्लेबाज की सामान्य पहुंच से बाहर जाती है। दोनों पर कम से कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और दोनों वैध गेंद की गिनती में शामिल नहीं होते। नो-बॉल पर सीमित ओवरों में अगली गेंद फ्री हिट हो सकती है, जबकि वाइड पर सामान्यतः ऐसा नहीं होता। बल्लेबाज द्वारा नो-बॉल पर छक्का लगाने पर टीम को 7 रन मिल सकते हैं, इसलिए केवल बल्लेबाज के निजी रन देखकर हिसाब न लगाएं।
प्रश्न: डीआरएस में अंपायर कॉल का क्या अर्थ है?
उत्तर: अंपायर कॉल का अर्थ है कि तकनीकी समीक्षा निर्णायक सीमा तक स्पष्ट नहीं पहुंची, इसलिए मैदान का मूल निर्णय बरकरार रहता है। एलबीडब्ल्यू में गेंद का पिचिंग, इम्पैक्ट और स्टंप पर लगने का अनुमान अलग-अलग जांचा जाता है। प्रतियोगिता के अनुसार प्रत्येक टीम को सीमित समीक्षा मिलती है और असफल समीक्षा बची रह सकती है या समाप्त हो सकती है। डीआरएस उपलब्ध है या नहीं, यह टेस्ट, एकदिवसीय, टी20 और संबंधित टूर्नामेंट की आधिकारिक शर्तों से तय होता है।
प्रश्न: क्रिकेट सीखने के लिए सबसे पहले क्या करना चाहिए?
उत्तर: सबसे पहले प्रारूप, ओवर, रन, विकेट और अतिरिक्त रन की मूल भाषा सीखनी चाहिए। एक स्कोरकार्ड देखकर टीम का कुल स्कोर, विकेटों की संख्या, ओवर और रन-रेट लिखें; फिर बॉल-बाय-बॉल विवरण से नो-बॉल, वाइड और विकेट का कारण मिलाएं। 167/3 का अर्थ 167 रन और 3 विकेट है, जबकि 7.50 रन-रेट का अर्थ प्रति ओवर औसतन 7.50 रन है। इसके बाद क्रिकेट नियमों की अभ्यास सूची से कैच, एलबीडब्ल्यू, रन-आउट और डीआरएस के उदाहरण दोहराएं।