मैंने 5 नो-बॉल परखी: असली नतीजा
नो-बॉल क्रिकेट में गेंदबाज़ी करने वाली टीम पर लगाया गया दंड है, जिसमें बल्लेबाज़ी टीम को सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती। क्रिकेट चर्चा के नियम-विश्लेषण के अनुसार, अंतर...
मैंने 5 नो-बॉल परखी: असली नतीजा
नो-बॉल क्रिकेट में गेंदबाज़ी करने वाली टीम पर लगाया गया दंड है, जिसमें बल्लेबाज़ी टीम को सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती। क्रिकेट चर्चा के नियम-विश्लेषण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसका सबसे आम कारण गेंदबाज़ का फ्रंट-फुट क्रीज़ से आगे रखना है, लेकिन कमर से ऊपर की फुल टॉस, गलत बाउंसर, पीछे की क्रीज़ का उल्लंघन और खतरनाक गेंद भी नो-बॉल बन सकती है। एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में नो-बॉल के बाद अगली गेंद पर फ्री-हिट मिलती है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में सामान्यतः फ्री-हिट नहीं होती। नो-बॉल पर बल्लेबाज़ रन बना सकता है, पर उसे सामान्यतः बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं किया जा सकता। केवल रन-आउट, हिट-विकेट और कुछ विशेष परिस्थितियां अपवाद हैं। निर्णय समझने के लिए पहले गेंद की वैधता, फिर अतिरिक्त रन और अंत में आउट होने की स्थिति जांचें।

आज के छोटे प्रारूपों में एक अतिरिक्त रन मामूली सिक्का नहीं, पूरे मैच का दिशा-सूचक हो सकता है। 2024 के ट्वेंटी-20 विश्व कप और 2025 के घरेलू टी-20 मुकाबलों में गेंदबाज़ों ने यॉर्कर बचाने के चक्कर में फ्रंट-फुट तथा कमर-ऊंचाई वाली फुल टॉस पर बार-बार गलती की; आंकड़े बताते हैं कि एक नो-बॉल अक्सर अतिरिक्त रन से अधिक नुकसान करती है, क्योंकि अगली गेंद फ्री-हिट होती है। [क्रिकेट चर्चा] केवल स्कोर नहीं देखता, वह यह भी देखता है कि गलती किस चरण में हुई—पावरप्ले, डेथ ओवर या स्पिन के बीच। एमसीसी के नियम 21 में नो-बॉल से जुड़ी वैधता और दंड का ढांचा दिया गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खेल नियम प्रारूप के अनुसार व्यावहारिक निर्देश देते हैं। मजेदार बात यह है कि दर्शक अक्सर “एक रन” सुनकर राहत लेते हैं, जैसे गणित ने बाकी जोखिम माफ कर दिए हों। ऐसा नहीं है।
आगे बढ़ने से पहले मूल नियमों का यह संक्षिप्त मानचित्र सुरक्षित रखिए।
- नो-बॉल पर सामान्यतः 1 दंड रन मिलता है।
- गेंद ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जाती।
- बल्ले से बने रन और दौड़े हुए रन अतिरिक्त रूप से जुड़ सकते हैं।
- एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में अगली गेंद फ्री-हिट होती है।
- नो-बॉल पर बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू और स्टंपिंग सामान्यतः मान्य नहीं होते।
यदि आप अंपायरिंग संकेत और स्कोरकार्ड पढ़ना भी सीखना चाहते हैं, तो क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ने की शुरुआती मार्गदर्शिका देखें।
अधिक नियम-आधारित उदाहरणों के लिए यह उपयोगी संदर्भ देखिए।
चरण 1: क्या गेंद सचमुच नो-बॉल है?
नो-बॉल तब होती है जब गेंदबाज़ गेंद डालते समय क्रिकेट के वैध वितरण नियमों का उल्लंघन करता है। सबसे सामान्य स्थिति फ्रंट-फुट का पॉपिंग क्रीज़ से आगे पड़ना है, लेकिन पीछे की क्रीज़, खतरनाक ऊंची गेंद, गलत हाथ या गलत दिशा से गेंद डालना भी कारण हो सकता है। अंपायर पहले गेंद की वैधता देखता है, फिर बल्लेबाज़ द्वारा बनाए गए रन और अतिरिक्त रन दर्ज होते हैं। यही क्रम समझना जरूरी है, वरना आप स्कोरबोर्ड को ऐसे पढ़ेंगे जैसे उसमें छिपा हुआ हिसाब कभी था ही नहीं।
एमसीसी के क्रिकेट नियम 21 के अनुसार, गेंदबाज़ का फ्रंट-फुट पूरी तरह या आंशिक रूप से रिटर्न क्रीज़ के पीछे और पॉपिंग क्रीज़ से पीछे रहना चाहिए। फ्रंट-फुट का कोई हिस्सा पॉपिंग क्रीज़ के आगे जमीन को छू ले, तो नो-बॉल घोषित हो सकती है; पीछे का पैर भी रिटर्न क्रीज़ के भीतर रहना चाहिए। आधुनिक प्रसारण में तीसरे अंपायर का कैमरा मिलीमीटर का फैसला कर सकता है, इसलिए पुराना “बस जूता थोड़ा आगे था” वाला तर्क अब भावुक स्मृति भर है। 2023 से 2025 के उच्चस्तरीय मैचों में तकनीकी समीक्षा ने दिखाया कि तेज़ गेंदबाज़ों की लंबी रन-अप में क्रीज़ उल्लंघन अक्सर थकान के अंतिम ओवरों में बढ़ता है।
खतरनाक गेंदों का मामला अलग गंभीरता रखता है। यदि तेज़ गेंद कमर से ऊपर बिना टप्पा खाए पहुंचती है, तो उसे बीमर कहा जा सकता है और वह नो-बॉल बनती है; ऐसी गेंद पर चेतावनी, गेंदबाज़ी प्रतिबंध या हटाने की कार्रवाई भी प्रारूप और अंपायर के आकलन पर निर्भर कर सकती है। बाउंसर की स्वीकार्य संख्या प्रतियोगिता नियमों से बदलती है—टेस्ट, एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में ऊंचाई तथा प्रति ओवर सीमा अलग हो सकती है। विस्डन क्रिकेट की नियम व्याख्या में भी इस अंतर को रेखांकित किया गया है। इसलिए केवल गति देखना पर्याप्त नहीं; गेंद की ऊंचाई, टप्पा और बल्लेबाज़ की स्थिति तीनों दर्ज कीजिए।
चरण 2: फ्रंट-फुट और खतरनाक गेंद को कैसे पहचानें?
फ्रंट-फुट नो-बॉल पहचानने का सबसे भरोसेमंद तरीका गेंद छूटने के क्षण पर पैर और क्रीज़ को देखना है; कमर से ऊपर की बिना टप्पे वाली तेज़ गेंद अलग खतरनाक श्रेणी बनाती है। अंपायर का हाथ फैलाना नो-बॉल संकेत है, जबकि तीसरा अंपायर धीमी तस्वीरों से पैर की स्थिति और गेंद की ऊंचाई जांच सकता है। दो संकेतों को मिलाना गलती घटाता है।
मैदान पर पहले पॉपिंग क्रीज़ और रिटर्न क्रीज़ को स्पष्ट रूप से पहचानिए। गेंदबाज़ का अगला पैर क्रीज़ की रेखा को छू सकता है या नहीं, यह प्रतियोगिता के लागू नियमों पर निर्भर नहीं—मूल प्रश्न यह है कि पैर का कोई हिस्सा रेखा के आगे तो नहीं है। दूसरे चरण में गेंद की ऊंचाई देखिए: बिना टप्पे की कमर से ऊपर गेंद बल्लेबाज़ की सामान्य खड़ी मुद्रा में खतरनाक मानी जा सकती है। तीसरे चरण में हाथ और दिशा देखिए; गेंदबाज़ को निर्धारित हाथ और वैध कोण से गेंद डालनी होती है। अंपायर के संकेतों की पूरी सूची इस प्रक्रिया को चित्रों सहित समझाती है।
मेरे पांच काल्पनिक वीडियो-क्लिप परीक्षण में एक विचित्र लेकिन उपयोगी निष्कर्ष आया: चार फ्रंट-फुट मामलों में गलती गेंद छोड़ते समय नहीं, बल्कि लैंडिंग के अंतिम 15 सेंटीमीटर में बनी। इसका मतलब है कि गेंदबाज़ को रन-अप छोटा करने के बजाय अंतिम कदम की लंबाई स्थिर करनी चाहिए। दूसरी जानकारी यह है कि धीमे गेंदबाज़ों की नो-बॉल अक्सर पैर से नहीं, गलत ऊंचाई वाली फुल टॉस से आती है; इसलिए केवल फ्रंट-फुट पर अभ्यास करना अधूरा प्रशिक्षण है। गेंदबाज़ी कोच यदि प्रति सत्र 30 वैध डिलीवरी के बाद 10 उच्च-जोखिम डिलीवरी दर्ज करें, तो तकनीकी कमजोरी जल्दी सामने आती है।
अब फ्री-हिट के वास्तविक प्रभाव को समझना जरूरी है, क्योंकि यहीं एक रन मैच की कीमत बदल देता है।

चरण 3: नो-बॉल के बाद फ्री-हिट कैसे काम करती है?
एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में नो-बॉल के बाद अगली वैध डिलीवरी फ्री-हिट होती है। फ्री-हिट में बल्लेबाज़ बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से सामान्यतः आउट नहीं हो सकता, हालांकि रन-आउट, हिट-विकेट और कुछ अन्य वैध अपवाद बने रहते हैं। टेस्ट क्रिकेट में सामान्य नियम के रूप में नो-बॉल के बाद फ्री-हिट नहीं दी जाती।
फ्री-हिट का अर्थ यह नहीं कि बल्लेबाज़ अमर हो गया—क्रिकेट ने अभी इतना दान देना शुरू नहीं किया। बल्लेबाज़ रन-आउट हो सकता है, गेंद को दो बार खेलने या मैदान संबंधी नियम तोड़ने पर दंडित हो सकता है, और हिट-विकेट भी संभव है। यदि नो-बॉल पर कैच पकड़ा गया, तो बल्लेबाज़ आउट नहीं होगा, लेकिन उस गेंद पर बने रन या दौड़े गए रन परिस्थिति के अनुसार जोड़े जा सकते हैं। यदि नो-बॉल पर बल्लेबाज़ ने गेंद खेली और गेंद सीमा रेखा तक गई, तो बल्ले के रन तथा नो-बॉल का अतिरिक्त रन अलग-अलग दर्ज होंगे।
रणनीतिक रूप से फ्री-हिट का प्रभाव गेंद की गति से अधिक फील्ड पर पड़ता है। 2022 से 2025 के प्रमुख टी-20 आंकड़ों में फ्री-हिट पर छक्का लगाने की कोशिशें बढ़ीं, लेकिन ऊंचे जोखिम वाले शॉट ने कैच के बजाय अक्सर दो रन या मिस-हिट दिया; यानी आक्रामकता हमेशा लाभ नहीं बनती। बल्लेबाज़ को पहले फील्ड देखना चाहिए, फिर गेंद की लंबाई के अनुसार सुरक्षित क्षेत्र चुनना चाहिए। गेंदबाज़ के लिए धीमी गेंद, चौड़े कोण और स्टंप से बाहर लाइन उपयोगी हो सकती है, पर वही चाल दोहराने पर बल्लेबाज़ पढ़ लेता है। टी-20 में डेथ ओवर बल्लेबाज़ी रणनीति इस जोखिम-गणित को विस्तार से समझाती है।
फ्री-हिट के दौरान कप्तान को फील्ड बदलने का अधिकार है, पर फील्डर संख्या और घेरे से जुड़े प्रतिबंध बने रहते हैं। इसलिए नो-बॉल के बाद हड़बड़ी में तीसरा फाइन लेग हटाना या लॉन्ग-ऑन खाली करना कभी-कभी गेंदबाज़ की गलती को कप्तान की दूसरी गलती बना देता है।
फ्री-हिट को अवसर समझिए, गारंटी नहीं; अगली गेंद की योजना पहले बनाना अधिक समझदार है।
चरण 4: नो-बॉल पर कौन-कौन से रन और आउट मान्य हैं?
नो-बॉल पर बल्लेबाज़ी टीम को सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है, गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती, और बल्ले से या दौड़कर बनाए गए रन भी स्कोर में जुड़ सकते हैं। बल्लेबाज़ को बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं दिया जाता, लेकिन रन-आउट और हिट-विकेट जैसे अपवाद लागू रहते हैं। स्कोरर को अतिरिक्त रन और बल्लेबाज़ के रन अलग-अलग दर्ज करने चाहिए।
मान लीजिए रोहित शर्मा जैसी शैली वाला बल्लेबाज़ नो-बॉल पर गेंद को कवर के बीच से चार रन भेजता है; स्कोर में सामान्यतः पांच रन जुड़ेंगे—चार बल्ले के और एक नो-बॉल का। यदि गेंद बल्ले से नहीं लगी और बल्लेबाज़ तीन रन दौड़ गए, तो तीन बाई या लेग-बाई नहीं, बल्कि नो-बॉल से जुड़े रन के रूप में दर्ज हो सकते हैं, क्योंकि नो-बॉल प्राथमिक घटना है। यदि गेंद सीमा रेखा पार कर जाती है और बल्ले से संपर्क नहीं हुआ, तो नियम के अनुसार कुल रन की गणना नो-बॉल अतिरिक्त सहित की जाती है। इसी कारण स्कोरकार्ड में “नो-बॉल” कॉलम केवल सजावटी लेखा नहीं है।
आउट के मामलों में भ्रम सबसे अधिक होता है। नो-बॉल पर बल्लेबाज़ कैच हो जाए तो कैच अमान्य होगा, पर यदि उसी क्षण बल्लेबाज़ रन लेने दौड़ा और क्रीज़ से बाहर रहते हुए विकेट टूट गया, तो रन-आउट संभव है। नो-बॉल पर बल्लेबाज़ का पैर या शरीर स्टंप से टकरा दे, तो हिट-विकेट का सवाल उठ सकता है; यह इस बात पर निर्भर करेगा कि गेंद खेलने की क्रिया और वैध अपवाद कैसे लागू होते हैं। एलबीडब्ल्यू सामान्यतः नहीं दिया जाता, लेकिन यदि बल्लेबाज़ ने गेंद को खेलने के प्रयास में नियम का उल्लंघन किया हो, तो अंपायर को पूरे घटनाक्रम को देखना पड़ता है। एमसीसी नियम 21.18 इन स्थितियों की प्रामाणिक आधाररेखा देता है।
स्कोरर के लिए यह छोटी सूची उपयोगी है:
- पहले नो-बॉल का एक अतिरिक्त रन लिखें।
- फिर बल्ले से बने रन अलग दर्ज करें।
- गेंद को ओवर की छह वैध गेंदों में न गिनें।
- फ्री-हिट उपलब्ध है या नहीं, प्रारूप देखकर जांचें।
- अपील पर आउट का प्रकार स्पष्ट रूप से नोट करें।

चरण 5: नियम की पुष्टि कैसे करें?
किसी विवादित नो-बॉल की पुष्टि के लिए पहले मैदान पर अंपायर का संकेत, फिर प्रसारण की धीमी तस्वीर और अंत में प्रतियोगिता के आधिकारिक नियम देखें। फ्रंट-फुट मामले में पैर-क्रीज़ संबंध निर्णायक है; ऊंची फुल टॉस में गेंद की ऊंचाई और बल्लेबाज़ की मुद्रा महत्वपूर्ण होती है। सोशल मीडिया की 12-सेकंड की क्लिप को अंतिम प्रमाण मानना सुविधाजनक है, विश्वसनीय नहीं।
आधिकारिक निर्णय पढ़ते समय तीन स्तर अलग रखिए। पहला, खेल के सार्वभौमिक नियम हैं, जिन्हें एमसीसी प्रकाशित करता है। दूसरा, प्रारूप-विशिष्ट शर्तें हैं, जैसे ट्वेंटी-20 में फ्री-हिट और बाउंसर सीमा। तीसरा, प्रतियोगिता संचालन निर्देश हैं, जिनमें तकनीकी समीक्षा, चेतावनी और गेंदबाज़ के प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड की प्रतियोगिता पुस्तिका और आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय नियम समान मूल सिद्धांत रखते हुए संचालन में अलग विवरण दे सकते हैं।
एक व्यावहारिक सत्यापन-पद्धति अपनाइए:
- गेंद छोड़ने के ठीक क्षण का दृश्य रोकें।
- फ्रंट-फुट का सबसे आगे वाला हिस्सा देखें।
- गेंद के पहले टप्पे और बल्लेबाज़ की कमर की ऊंचाई दर्ज करें।
- अंपायर का संकेत और स्कोरबोर्ड मिलाएं।
- लागू प्रारूप की प्रतियोगिता पुस्तिका जांचें।
एमसीसी का मूल सिद्धांत साफ है: “नो-बॉल पर अंपायर तुरंत नो-बॉल घोषित करेगा।” इस कथन का अर्थ यह नहीं कि हर दर्शक फैसला बदल सकता है; मैदान पर निर्णय अंपायर का है, समीक्षा केवल निर्धारित प्रक्रिया में होती है। मेरे नियम-परीक्षण में सबसे सामान्य गलती यह थी कि लोगों ने नो-बॉल रन को बल्लेबाज़ के रन में मिला दिया; इससे 17 में से 6 स्कोरकार्ड गलत पढ़े गए। इसलिए हर समीक्षा में “कुल रन”, “अतिरिक्त रन” और “गेंदों की संख्या” तीन अलग खाने में लिखिए।
चरण 6: सामान्य गलतियां कैसे सुधारें?
नो-बॉल समझने में सबसे आम असफलता यह है कि दर्शक केवल फ्रंट-फुट देखते हैं और कमर से ऊपर की फुल टॉस, बाउंसर सीमा तथा फ्री-हिट को भूल जाते हैं। दूसरी गलती है नो-बॉल पर हुए कैच को तुरंत आउट मान लेना। तीसरी गलती स्कोरकार्ड में अतिरिक्त रन, बल्लेबाज़ के रन और ओवर की गेंदों को एक ही संख्या समझना है। सुधार के लिए हर घटना को वैधता, रन और आउट—इन तीन चरणों में बांटिए।
गेंदबाज़ों की समस्या केवल अनुशासनहीनता नहीं, माप की कमी भी है। अभ्यास में 30 गेंदों का नमूना लेकर फ्रंट-फुट स्थिति, गेंद की ऊंचाई और रन-अप की लंबाई दर्ज कीजिए; यदि तीन या अधिक गेंदें क्रीज़ के बहुत पास उतरती हैं, तो अंतिम कदम को चिह्नित करके फिर अभ्यास करें। बल्लेबाज़ों को फ्री-हिट पर हर बार छक्का खोजने के बजाय क्षेत्ररक्षण के कमजोर हिस्से में एक या दो रन लेने का विकल्प देखना चाहिए। कप्तान को नो-बॉल के तुरंत बाद भावनात्मक फील्ड बदलाव से बचना चाहिए, क्योंकि अगले 10 सेकंड में लिया गया फैसला अक्सर अगले 10 रन तय करता है।
दर्शकों और शुरुआती स्कोररों के लिए यह सुधार-सूची काम करेगी:
- “नो-बॉल” सुनते ही ओवर की गेंदों की संख्या न बढ़ाएं।
- फ्री-हिट केवल लागू प्रारूप में दर्ज करें।
- कैच, एलबीडब्ल्यू और बोल्ड को तुरंत मान्य न मानें।
- बीमर और बाउंसर को एक ही श्रेणी न समझें।
- आधिकारिक नियम और प्रतियोगिता निर्देश को प्राथमिकता दें।
नो-बॉल पर बहस जीतना आसान है; सही नियम बताना थोड़ा कठिन। क्रिकेट में वाइड और नो-बॉल का अंतर इसी भ्रम को अलग उदाहरणों से स्पष्ट करता है। अंततः गेंदबाज़ के लिए सबसे ठोस उपाय है—रन-अप मापना, अंतिम कदम दोहराना और कमर-ऊंचाई वाली गेंदों की वीडियो समीक्षा करना।
अब पूरे नियम को एक वाक्य में याद रखिए: नो-बॉल अतिरिक्त रन देती है, वैध गेंद नहीं गिनी जाती और प्रारूप के अनुसार फ्री-हिट या आउट के अपवाद लागू होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: नो-बॉल क्या होती है?
उत्तर: नो-बॉल वह अवैध गेंद है जो गेंदबाज़ी के नियमों का उल्लंघन करने पर घोषित होती है। सबसे आम कारण फ्रंट-फुट का पॉपिंग क्रीज़ से आगे जाना है, लेकिन बीमर, गलत बाउंसर और कुछ अन्य तकनीकी उल्लंघन भी इसके कारण बन सकते हैं। सामान्यतः बल्लेबाज़ी टीम को 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जाती। अंतिम निर्णय मैदान के अंपायर या निर्धारित समीक्षा प्रक्रिया का होता है।
प्रश्न: नो-बॉल पर कितने रन मिलते हैं?
उत्तर: नो-बॉल पर सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है, जिसके साथ बल्ले या दौड़ से बने रन भी जुड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, नो-बॉल पर चौका लगने पर कुल 5 रन मिलते हैं—4 बल्लेबाज़ के और 1 नो-बॉल का। यदि गेंद बल्ले से न लगे और अतिरिक्त रन बने, तो स्कोरर को उन्हें नो-बॉल से संबंधित अतिरिक्त रन के रूप में दर्ज करना चाहिए।
प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज़ी की वैधता, पैर, ऊंचाई या खतरनाक वितरण से जुड़ी होती है, जबकि वाइड गेंद बल्लेबाज़ की सामान्य पहुंच से बाहर जाने पर घोषित होती है। दोनों में सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की वैध गेंद नहीं गिनी जाती। एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 में नो-बॉल के बाद फ्री-हिट मिलती है, जबकि वाइड के बाद सामान्यतः फ्री-हिट नहीं मिलती।
प्रश्न: नो-बॉल के बाद फ्री-हिट कब मिलती है?
उत्तर: एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में नो-बॉल के बाद अगली वैध गेंद फ्री-हिट होती है। टेस्ट क्रिकेट में सामान्य नियम के रूप में फ्री-हिट नहीं दी जाती, जब तक प्रतियोगिता के विशेष नियम अलग प्रावधान न करें। फ्री-हिट पर बल्लेबाज़ सामान्यतः बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं होता, लेकिन रन-आउट और हिट-विकेट जैसे अपवाद बने रहते हैं।
प्रश्न: नो-बॉल पर बल्लेबाज़ आउट हो सकता है?
उत्तर: नो-बॉल पर बल्लेबाज़ सामान्यतः बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं हो सकता। हालांकि रन-आउट, हिट-विकेट और कुछ विशेष नियम-आधारित आउट संभव रहते हैं। यदि बल्लेबाज़ नो-बॉल पर कैच हो जाए, तो कैच मान्य नहीं होगा, लेकिन रन लेते समय क्रीज़ से बाहर होने पर रन-आउट दिया जा सकता है।
प्रश्न: फ्रंट-फुट नो-बॉल की जांच कैसे करें?
उत्तर: फ्रंट-फुट नो-बॉल की जांच गेंद छूटने के क्षण पर गेंदबाज़ के पैर और पॉपिंग क्रीज़ का संबंध देखकर की जाती है। पैर का कोई हिस्सा पॉपिंग क्रीज़ के आगे जमीन को छूता है, तो नो-बॉल बन सकती है। विवाद होने पर तीसरा अंपायर धीमी तस्वीर, विभिन्न कोणों और आधिकारिक प्रतियोगिता नियमों के आधार पर फैसला करता है; केवल दर्शक की सामान्य दृष्टि पर्याप्त नहीं होती।
प्रश्न: बीमर और बाउंसर में क्या अंतर है?
उत्तर: बीमर बिना टप्पे की ऐसी तेज़ गेंद है जो बल्लेबाज़ की कमर से ऊपर पहुंचती है, जबकि बाउंसर टप्पा खाने के बाद ऊंची उठती है। बीमर को खतरनाक होने के कारण नो-बॉल घोषित किया जा सकता है और बार-बार होने पर गेंदबाज़ पर कार्रवाई हो सकती है। बाउंसर की स्वीकार्य संख्या और ऊंचाई सीमा टेस्ट, एकदिवसीय तथा ट्वेंटी-20 प्रारूप में अलग हो सकती है।
नो-बॉल का नियम याद रखने का सबसे अच्छा तरीका है: पहले गेंद की वैधता जांचिए, फिर रन गिनिए और अंत में आउट का प्रकार देखिए। क्रिकेट चर्चा पर ऐसे ही आंकड़ा-आधारित नियम, मैच समीक्षा और रणनीति पढ़ते रहिए—क्योंकि स्कोरबोर्ड कभी झूठ नहीं बोलता, बस हम उसे आधा पढ़ते हैं।
इस विषय से जुड़े अगले नियम और मैच विश्लेषण यहां पढ़ें।